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Write an application to the Principal for acceptance of admission in the school by choosing the words given in the box and filling the blanks 


मज्जूषा में दिए गए शब्दों को चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति करते हुए प्रधानाचार्य को विद्यालय में प्रवेश की स्वीकृति हेतु प्रार्थना-पत्र लिखिए


  

सविनयम्‌,         दूरे,      सधन्यवाद:            मान्यवर,           गृहे,         प्रदाय,

प्रधानाचार्य मंहोदया:,        दशमकक्षायाम्‌,         विद्यालये,             आज्ञाकारी |

 

 

सेवायाम्‌
                                     
            श्रीमन्त (i) .............प्रधानाचार्य महोदया:.................

            राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय:

            क० ख० ग०                           

           (ii) ............मान्यवर,.............

           (iii) ..........सविनयम्‌............ निवेदनम्‌ इदम्‌ अस्ति यत्‌ अहम्‌                         

           (iv) .........दशमकक्षायाम्‌......... 95% अंकान्‌ लब्ध्वा उत्तीर्णजात:|                   

           अस्माभिः स्वनिर्मिते    (v) ................गृहे............ हयः एव प्रवेश: कृत: ।

           मम्‌ गृह पूर्व विद्यालय इव पञ्चदश कोश पर्यन्त                                 

           (vi) ............दूरे................  अस्ति अहम्‌ विज्ञानक्षेत्रे भवताम्‌   

          (vii) ...........विद्यालये..................  प्रवेष्टुमू इच्छामि | कृपया मह्यम्‌ स्वीकृर्ती 

          (viii) ...............प्रदाय...............     अनुगृहणन्तु |

 

                                                                                                    (ix) ........सधन्यवाद: ............

                                                                                     भवताम  (x) ....आज्ञाकारी......... शिष्यः

                                                                                                                              क० ख० ग०


अपने प्रधानाचार्य को पत्र लिखें जिसमें आपको कक्षा में जिन वस्तुओं की आवश्यकता है उनको सूची बनाकर प्रस्तुत करें

 

Write a letter to your principal listing the items you need in class and presenting them


उत्तर :-

सेवा में
            प्रधानाचार्य,
            केंद्रीय विद्यालय नं० 2,
            शिमला।


मान्यवर,
                हमारी कक्षा का श्याम पट इतना घिस गया है कि इस पर कुछ लिखना संभव नहीं। डस्टर तथा चॉक भी नहीं हैं। बाहर जाने का अनुमति-पत्र भी नहीं। हम दो-तीन बार मुख्य लिपिक से इन वस्तुओं की व्यवस्था के लिए प्रार्थना कर चुके हैं पर उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया।

          कृपया आप इन वस्तुओं की व्यवस्था करने का आदेश दे कर हमें कृतार्थ करें।


आपका शिष्य,
दिनेश
कक्षा दशम-सी
दिनांक : 13, नवंबर, 20....

 





बस दवारा यात्रा करने पर आपको कुछ असुविधाओं का सामना करना पड़ा, उन्हें दूर करने के लिए
बस प्रबंधक को एक पत्र लिखिए

To overcome some inconveniences you faced while traveling by bus, write a letter to bus manager

उत्तर :- 


18 मॉडल टाउन 

गुरदासपुर।

13.04.20.........

सेवा में 

           प्रबंधक 

            राज्य परिवहन,

            चंडीगढ़।

 

महोदय 

           निवेदन है की मैंने इसी मास की 16 तारीख को गुरदासपुर से दिल्ली तक की यात्रा की थी। मैंने समय पर टिकट खरीदी थी लेकिन जब मैंने बस में प्रवेश किया तो वह सवारियों से ठसा-ठस भरी हुई थी। उनमें से अधिकांश के पास टिकट नहीं थी। मैंने अपनी टिकट कंडक्टर को दिखाई और उससे अपनी सीट पूछी। उसने साफ-साफ कहा कि मैं अपनी सीट स्वयं तलाश करू। मैंने नम्र स्वर में उससे खा की मैंने टिकट बस में प्रवेश किया है इसलिए मुझे एक सीट मिलनी चाहिए। जिन सवारियों के पास टिकट नहीं है उनमें से कोई एक सीट मुझे मिलनी चाहिए लेकिन उसने मेरी बात को अनसुना कर दिया । मैंने जिस बस में बैठने की टिकट ली थी वह एक्सप्रेस थी और उसे रास्ते में कंही भी नही रुकना था लेकिन कंडक्टर ने बस को बार-बार रुकवा कर सवारियों को भीतर प्रवेश कराया। बार-बार बस रुकने से अपने गंतव्य स्थान तक पहुँचने में मुझे बहुत देर हुई। मैं अपने जिस सरकारी कार्य से जा रही थी मैं वंहा समय पर नहीं पहुंच सकी। मुझ जैसे अन्य यात्रियों ने भरी उससे यही शिकायत की थी लेकिन वह मुस्कुराता हुआ चला गया था।

      आप से मेरा नम्र निवेदन है कि आप उस कंडक्टर से पूछताछ कर उसे दंडित करें ताकि भविष्य में अपने व्यवहार को बदल कर कार्य करे।

सधन्यवाद।

भवदीय
रीना गुप्ता


अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को उचित कारण बताते हुए आर्थिक दंड क्षमा करने हेतु प्रार्थना-पत्र लिखें

Write an application to the principal of your school giving the proper reason for waiving the monetary penalty.

उत्तर : -

सेवा में
            प्रधानाचार्य,
            राजकीय उच्च विद्यालय,
            सुंदरनगर।

मान्यवर,
                सविनय निवेदन है कि गत शनिवार को हमारी श्रेणी की मासिक परीक्षा हुई थी। उस दिन बहुत भारी वर्षा हो रही थी जिससे मैं कक्षा में उपस्थित नहीं हो सका। मेरा गाँव स्कूल से लगभग चार किलोमीटर
दूर है। इसमें लगभग आधी सड़क कच्ची है। वर्षा होने के कारण रास्ता रुक गया जिससे मेरे लिए स्कूल पहुँचना कठिन था। अध्यापक महोदय ने समझा कि मैं जानबूझ कर परीक्षा में अनुपस्थित रहा हूँ। इसलिए उन्होंने मुझे बीस रुपये का आर्थिक दंड दिया है। आप मेरी विवशता को ध्यान में रखते हुए आर्थिक दंड क्षमा करने की कृपा करें। आपको मैं विश्वास दिलाता हूँ कि भविष्य में मैं अधिक सावधान रहूँगा।


धन्यवाद सहित,


आपका आज्ञाकारी शिष्य,

अभिनव

दसवीं कक्षा

दिनांक : 13 सितंबर, 20........
 



मम विद्यालय: संस्कृत निबंध

Mam Vidyalya Sanskrit Nibandha 

 5 lines on Mam Vidyalya in sanskrit​

उत्तराणि---



(1) मम विद्यालय: नगरस्य एकस्मिन्‌ सुरम्ये स्थले स्थित: अस्ति।

(2) प्राडगणस्य मध्ये एक सुन्दरम्‌ उद्यानं वर्तते।

(3) अध्यापकानां संख्या सप्तति:, छात्राणां च सहस्रद्दयं वर्तते।

(4) अध्यापका: अतीव निपुणा: योग्या: स्वविषय-पारड्गता: च सन्ति।

(5) शिक्षाक्षेत्रे अस्य ख्याति: समग्रदेशे अस्ति।


पर्यावरणम्‌ संस्कृत निबंध

Paryavaran Sanskrit Nibandha 

 5 lines on Paryavaran in sanskrit​

उत्तराणि---



(1) पर्यावरणस्य मानवजीवने अतिमहत्त्वपूर्ण स्थान वर्तते।

(2) यत्र पर्यावरणं शुद्धं भवति तत्र जीवनमपि सुखमयं भवति।

(3) स्वस्थ पर्यावरणमेव मानवजीवन॑स्थ आधार: अस्ति।

(4) दूषितपर्यावरणेन अनेके रोगा: उद्भूता: भवन्ति।

(5) औद्योगिकसंस्थानेभ्य: निर्गतेन वायुना पर्यावरण दूषितं भवति।

(6) साम्प्रतं तु जलं वायु: आकाशं चापि शुद्धं नास्ति।

(7) पर्यावरणरक्षणाय वयं सदा प्रयत्नशीला: भवेम।


महाकवि: कालिदास: संस्कृत निबंध

Mahakavi Kalidas Sanskrit Nibandha 

5 lines on Mahakavi Kalidas in sanskrit​

उत्तराणि---


(1) महाकवि-कालिदास: संस्कृतसाहित्यस्य श्रेष्ठ: कवि: अस्ति।

(2) अस्य पत्नी 'विद्योत्तमा' आसीत्‌।

(3) कालिदासेन सप्तग्रन्था: रचिता:--द्वे महाकाव्ये, द्वे गीतिकाव्ये, त्रीणि नाटकानि च।

(4) “अभिज्ञानशाकुन्तलम्‌' अस्य श्रेष्ठनाटकम्‌ अस्ति।

(5) एष: उपमालड्कार-प्रयोगे सिद्धकवि: आसीतू।

(6) अतएव उक्ति: प्रचलिता--' उपमा कालिदांसस्य '।


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